अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के।।
मूल पाठ
चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के।।
संपुट भरत सनेह रतन के। आखर जुग जुन जीव जतन के।।
स्रोत अभिलेख 2.316 · पुस्तक पृ. 608, 609
भावार्थ
मूल पाठ के बादकरुणानिधान श्रीरामचन्द्रजीके दोनों खड़ाऊँ प्रजाके प्राणोंकी रक्षाके लिये मानो दो पहरेदार हैं। भरतजीके प्रेमरूपी रत्नके लिये मानो डिब्बा है और जीवके साधनके लिये मानो राम-नामके दो अक्षर हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 608 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के।।
English explanation
Those sandals of Rama, the treasury of compassion, were like two watchmen guarding the lives of his subjects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरनपीठ | चरणों के आधार, खड़ाऊँ | footrests—the sandals |
| करुनानिधान | करुणा के भंडार राम | Rama, the treasury of compassion |
| के | की | belonging to |
| जनु | मानो | as though |
| जुग | दो; जोड़ी | two; a pair |
| जामिक | पहरेदार | watchmen |
| प्रजा | प्रजा | the subjects |
| प्रान | प्राणों | lives |
| के | के रक्षक | guarding; of |
2 संपुट भरत सनेह रतन के। आखर जुग जुन जीव जतन के।।
English explanation
They were a casket for the jewel of Bharata’s love, and as though two sacred syllables for the soul’s spiritual endeavor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संपुट | रत्न रखने की डिबिया | a jewel casket |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| सनेह | प्रेम | love |
| रतन | रत्न | jewel |
| के | के लिए; का | for; of |
| आखर | अक्षर | syllables |
| जुग | दो | two |
| जुन | मानो | as though |
| जीव | जीव; जीवात्मा | the individual soul |
| जतन | साधना; प्रयत्न | spiritual endeavor |
| के | के | for; of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.316
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 608
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 608, 609
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।