अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।
मूल पाठ
भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।
स्रोत अभिलेख 2.218 · पुस्तक पृ. 524, 525
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारा जगत् श्रीरामको जपता है, वे श्रीरामजी जिनको जपते हैं उन भरतजीके समान श्रीरामचन्द्रजीका प्रेमी कौन होगा?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 525 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।
English explanation
Who loves Rama as Bharata does? The world repeats Rama’s name, while Rama repeats Bharata’s.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सरिस | के समान | like |
| को | कौन | who |
| राम | राम का | of Rama |
| सनेही | प्रेमी | loving devotee |
| जगु | संसार | the world |
| जप | नाम जपता है | repeats the name of |
| राम | राम का नाम | Rama |
| रामु | राम स्वयं | Rama himself |
| जप | नाम जपते हैं | repeats the name of |
| जेही | जिसका; अर्थात भरत का | whom; namely Bharata |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.218
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 525
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 525
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।