अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।।
मूल पाठ
जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।।
लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा।।
स्रोत अभिलेख 2.218 · पुस्तक पृ. 524, 525
भावार्थ
मूल पाठ के बादपर जो कोई उनके भक्तका अपराध करता है, वह श्रीरामकी क्रोधाग्रिमें जल जाता है। लोक और वेद दोनोंमें इतिहास (कथा) प्रसिद्ध है। इस महिमाको दुर्वासाजी जानते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 525 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।।
English explanation
Whoever wrongs a devotee burns in the fire of Rama’s wrath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| अपराधु | अपराध; अहित | offense; wrong |
| भगत | भक्त | devotee |
| कर | के प्रति | against |
| करई | करता है | commits |
| राम | राम के | Rama’s |
| रोष | क्रोध की | of wrath |
| पावक | अग्नि में | in the fire |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| जरई | जलता है | burns |
2 लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा।।
English explanation
This account is well known among people and in the Vedas; the sage Durvasa knows this greatness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोकहुँ | लोक में भी | among people too |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | प्रसिद्ध; ज्ञात | well known |
| इतिहासा | वृत्तांत | account; story |
| यह | यह | this |
| महिमा | महिमा; प्रताप | greatness; power |
| जानहिं | जानते हैं | knows |
| दुरबासा | ऋषि दुर्वासा | the sage Durvasa |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.218
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 525
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 525
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।