अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।।
मूल पाठ
तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।।
सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.218 · पुस्तक पृ. 524, 525
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय (पिछली बार) तो श्रीरामचन्द्रजीका रुख जानकर कुछ किया था। परन्तु इस समय कुचाल करनेसे हानि ही होगी। हे देवराज! श्रीरघुनाथजीका स्वभाव सुनो, वे अपने प्रति किये हुए अपराधसे कभी रुष्ट नहीं होते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 525 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।।
English explanation
Earlier, something was done with knowledge of Rama’s intent; now a crooked scheme will bring harm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब; पहले | then; earlier |
| किछु | कुछ | something |
| कीन्ह | किया था | was done |
| राम | राम की | Rama’s |
| रुख | इच्छा; अभिप्राय | intent; inclination |
| जानी | जानकर | having understood |
| अब | अब | now |
| कुचालि | कुटिल चाल | crooked scheme |
| करि | करके | by carrying out |
| होइहि | होगी | will occur |
| हानी | हानि | harm |
2 सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।।
English explanation
Listen, O king of the gods, to Rama’s nature: he never grows angry at an offense against himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुरेस | हे देवराज इंद्र | O Indra, lord of the gods |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| निज | अपने प्रति | against himself |
| अपराध | अपराध पर | at an offense |
| रिसाहिं | क्रोधित होते हैं | grows angry |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.218
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 525
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 525
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