अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत बचन सुनि मुनि सुखु पाई। सबहिं कीन्ह बहु भाँति बड़ाई।।
मूल पाठ
भरत बचन सुनि मुनि सुखु पाई। सबहिं कीन्ह बहु भाँति बड़ाई।।
तात करहु जनि सोचु बिसेषी। सब दुखु मिटहि राम पग देखी।।
स्रोत अभिलेख 2.212 · पुस्तक पृ. 519, 520
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीके वचन सुनकर मुनिने सुख पाया और सभीने उनकी बहुत प्रकारसे बड़ाई की। [मुनिने कहा—] हे तात! अधिक सोच मत करो। श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंका दर्शन करते ही सारा दु:ख मिट जायगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 520 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत बचन सुनि मुनि सुखु पाई। सबहिं कीन्ह बहु भाँति बड़ाई।।
English explanation
Hearing Bharata's words, the sage felt joy; everyone praised Bharata in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata's |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि भरद्वाज | the sage Bharadvaja |
| सुखु | सुख | joy |
| पाई | पाया | experienced |
| सबहिं | सबने | everyone |
| कीन्ह | की | offered |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
2 तात करहु जनि सोचु बिसेषी। सब दुखु मिटहि राम पग देखी।।
English explanation
Dear child, do not grieve excessively; all sorrows will vanish when you behold Rama's feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear child |
| करहु | करो | do |
| जनि | मत | do not |
| सोचु | चिंता या शोक | worry or grief |
| बिसेषी | अधिक | excessive |
| सब | सभी | all |
| दुखु | दुःख | sorrows |
| मिटहि | मिट जाएँगे | will vanish |
| राम | श्रीराम के | Rama's |
| पग | चरण | feet |
| देखी | देखकर | upon beholding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.212
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 520
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 519, 520
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