अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीके वचन सुनकर और उनका स्वभाव देखकर समाजसहित राजा जनक उनकी सराहना करने लगे। भरतजीके वचन सुगम और अगम, सुन्दर, कोमल और कठोर हैं। उनमें अक्षर थोड़े हैं, परन्तु अर्थ अत्यन्त अपार भरा हुआ है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 589 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।।
सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे। अरथु अमित अति आखर थोरे।।
स्रोत अभिलेख 2.294 · पुस्तक पृ. 589, 590
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।।
English explanation
AI-draft interpretation: Hearing Bharata’s words and observing his noble disposition, King Janaka praised him along with the assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के; राम के भाई | of Bharata, Rama’s brother |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| देखि | देखकर | having observed |
| सुभाऊ | उत्तम स्वभाव | noble disposition |
| सहित | के साथ | together with |
| समाज | सभा के लोग | the assembly |
| सराहत | सराहने लगे | began praising |
| राऊ | राजा जनक | King Janaka |
2 सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे। अरथु अमित अति आखर थोरे।।
English explanation
Bharata’s words are accessible yet profound, gentle, graceful, and firm; their meaning is boundless, though their syllables are very few.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुगम | सहज समझ में आने वाले | readily understandable |
| अगम | गहराई में समझना कठिन | difficult to fathom |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मंजु | सुंदर और मनोहर | graceful and pleasing |
| कठोरे | कठोर अथवा दृढ़ | stern or firm |
| अरथु | अर्थ | meaning |
| अमित | असीम | boundless |
| अति | बहुत | very |
| आखर | अक्षर | syllables |
| थोरे | थोड़े | few |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.294
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 589
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 589, 590
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।