अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीके वचन सुनकर और उनका प्रेम देखकर सारी सभासहित मुनि वसिष्ठजी विदेह हो गये (किसीको अपने देहकी सुधि न रही)। भरतजीकी महान् महिमा समुद्र है, मुनिकी बुद्धि उसके तटपर अबला स्त्रीके समान खड़ी है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 558 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।।
भरत महा महिमा जलरासी। मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी।।
स्रोत अभिलेख 2.257 · पुस्तक पृ. 558, 558
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।।
English explanation
AI draft: Hearing Bharata’s words and seeing his love, the sage and the entire assembly lost awareness of their bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | श्रीराम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| देखि | देखकर | having seen |
| सनेहू | प्रेम | love |
| सभा | सभा | assembly |
| सहित | के साथ | together with |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vasishtha |
| भए | हो गए | became |
| बिदेहू | देह की सुध से रहित | oblivious to the body |
2 भरत महा महिमा जलरासी। मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी।।
English explanation
Bharata’s great glory is a vast expanse of water; the sage’s intellect stands on its shore like a helpless woman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| महा | महान | great |
| महिमा | महिमा | glory |
| जलरासी | विशाल जलराशि | vast body of water |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| मति | बुद्धि | intellect |
| ठाढ़ि | खड़ी है | stands |
| तीर | तट पर | on the shore |
| अबला | असहाय स्त्री | a helpless woman |
| सी | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.257
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 558
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 558, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।