अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत बचन सुचि सुनि सुर हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीके पवित्र वचन सुनकर देवता हर्षित हुए और 'साधु-साधु कहकर सराहना करते हुए देवताओंने फूल बरसाये। अयोध्यानिवासी असमंजसके वश हो गये [कि देखें अब श्रीरामजी क्या कहते हैं]। तपस्वी तथा वनवासी लोग [श्रीरामजीके वनमें बने रहनेकी आशासे] मनमें परम आनन्दित हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 568 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत बचन सुचि सुनि सुर हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
असमंजस बस अवध नेवासी। प्रमुदित मन तापस बनबासी।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 568, 569
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरत बचन सुचि सुनि सुर हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
English explanation
AI draft: Hearing Bharata’s pure words, the gods rejoiced. Praising them as excellent, they showered flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s, Rama’s brother |
| बचन | वचन | words |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुर | देवता | the gods |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| साधु | बहुत अच्छा! | excellent! |
| सराहि | प्रशंसा करके | having praised |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुर | देवताओं ने | the gods |
| बरषे | बरसाए | showered |
2 असमंजस बस अवध नेवासी। प्रमुदित मन तापस बनबासी।।
English explanation
The residents of Ayodhya were caught in uncertainty, while the ascetics and forest dwellers were delighted at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असमंजस | दुविधा के | uncertainty |
| बस | वश में | in the grip of |
| अवध | अयोध्या के | of Ayodhya |
| नेवासी | निवासी | residents |
| प्रमुदित | बहुत प्रसन्न | delighted |
| मन | मन में | at heart |
| तापस | तपस्वी | ascetics |
| बनबासी | वन में रहनेवाले | forest dwellers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 568
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 568, 569
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।