अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चुपहिं रहे रघुनाथ सँकोची। प्रभु गति देखि सभा सब सोची।।
मूल पाठ
चुपहिं रहे रघुनाथ सँकोची। प्रभु गति देखि सभा सब सोची।।
जनक दूत तेहि अवसर आए। मुनि बसिष्ठँ सुनि बेगि बोलाए।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 568, 569
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिन्तु संकोची श्रीरघुनाथजी चुप ही रह गये। प्रभुकी यह स्थिति (मौन) देख सारी सभा सोचमें पड़ गयी। उसी समय जनकजीके दूत आये, यह सुनकर मुनि वसिष्ठजीने उन्हें तुरंत बुलवा लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 568 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चुपहिं रहे रघुनाथ सँकोची। प्रभु गति देखि सभा सब सोची।।
English explanation
Rama, restrained by his sensitivity, remained silent. Seeing the Lord’s state, the entire assembly grew anxious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चुपहिं | चुप ही | silent indeed |
| रहे | रहे | remained |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| सँकोची | संकोचशील | sensitive and reserved |
| प्रभु | प्रभु राम की | Lord Rama’s |
| गति | दशा | state |
| देखि | देखकर | seeing |
| सभा | सभा | assembly |
| सब | सारी | entire |
| सोची | चिंतित हुई | became anxious |
2 जनक दूत तेहि अवसर आए। मुनि बसिष्ठँ सुनि बेगि बोलाए।।
English explanation
At that moment, King Janaka’s messengers arrived. Hearing of this, sage Vasistha summoned them immediately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक के | of King Janaka, Sita’s father |
| दूत | दूत | messengers |
| तेहि | उसी | that very |
| अवसर | समय | moment |
| आए | आए | arrived |
| मुनि | मुनि | sage |
| बसिष्ठँ | वसिष्ठ ने | Vasistha |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बेगि | तुरंत | immediately |
| बोलाए | बुलाया | summoned them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 568
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 568, 569
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।