अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता।।
मूल पाठ
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता।।
कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी।।
स्रोत अभिलेख 2.35 · पुस्तक पृ. 372, 373
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा व्याकुल हो गये, उनका सारा शरीर शिथिल पड़ गया, मानो हथिनीने कल्पवृक्षको उखाड़ फेंका हो। कण्ठ सूख गया, मुखसे बात नहीं निकलती, मानो पानीके बिना पहिना नामक मछली तड़प रही हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 372 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता।।
English explanation
AI-draft interpretation: King Dasharatha is distraught, all his limbs limp, as though a female elephant had felled a wish-fulfilling tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल | distraught |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सिथिल | शिथिल | limp |
| सब | सभी | all |
| गाता | अंग | limbs |
| करिनि | हथिनी ने | by a female elephant |
| कलपतरु | इच्छाएँ पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष | the wish-fulfilling tree |
| मनहुँ | मानो | as though |
| निपाता | गिरा दिया हो | had felled |
2 कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी।।
English explanation
His throat is dry, and no words come from his mouth; he is like a fish helpless without water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंठु | कंठ | throat |
| सूख | सूख गया | has dried up |
| मुख | मुख से | from the mouth |
| आव | आती है | comes |
| न | नहीं | not |
| बानी | वाणी | speech |
| जनु | मानो | as though |
| पाठीनु | मछली | a fish |
| दीन | बेहाल | helpless |
| बिनु | बिना | without |
| पानी | पानी | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 372
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 372, 373
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।