अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब नीतिमें निपुण और शील, स्नेह, सरलता और सुखके समुद्र श्रीरामचन्द्रजी वचन बोले— हे तात! परिणाममें होनेवाले आनन्दको हृदयमें समझकर तुम प्रेमवश अधीर मत होओ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 402 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।
तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.7 · पुस्तक पृ. 401, 402
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।
English explanation
Rama, skilled in right conduct and an ocean of virtue, affection, simplicity, and happiness, spoke these words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | कहे | spoke |
| बचनु | वचन | words |
| राम | राम ने | Rama |
| नय | नीति, उचित आचरण में | in right conduct |
| नागर | निपुण | skilled |
| सील | शील, सदाचरण | virtue and good conduct |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सरल | सरलता | simplicity and sincerity |
| सुख | सुख | happiness |
| सागर | सागर | an ocean |
2 तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।
English explanation
‘Dear brother, do not become distressed under love’s sway. Consider the consequences in your heart and take courage.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| प्रेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश में | under the sway |
| जनि | मत | do not |
| कदराहू | कातर होओ | become distressed |
| समुझि | समझकर, विचारकर | having considered |
| हृदयँ | हृदय में | in your heart |
| परिनाम | परिणाम | the consequences |
| उछाहू | उत्साहित होओ, साहस रखो | take heart and courage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 402
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 401, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।