अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैरिउ राम बड़ाई करहीं। बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं।।
मूल पाठ
बैरिउ राम बड़ाई करहीं। बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं।।
सारद कोटि कोटि सत सेषा। करि न सकहिं प्रभु गुन गन लेखा।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 509, 510
भावार्थ
मूल पाठ के बादशत्रु भी श्रीरामजीकी बड़ाई करते हैं। बोल-चाल, मिलनेके ढंग और विनयसे वे मनको हर लेते हैं। करोड़ों सरस्वती और अरबों शेषजी भी प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके गुणसमूहोंकी गिनती नहीं कर सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 509 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बैरिउ राम बड़ाई करहीं। बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं।।
English explanation
Even enemies praise Rama; his manner of speaking and meeting others, and his humility, captivate hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैरिउ | शत्रु भी | even enemies |
| राम | राम की | Rama’s |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| करहीं | करते हैं | offer; give |
| बोलनि | बोलने का ढंग | manner of speaking |
| मिलनि | मिलने का ढंग | manner of meeting others |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| मन | मन | hearts |
| हरहीं | मोह लेते हैं | captivate |
2 सारद कोटि कोटि सत सेषा। करि न सकहिं प्रभु गुन गन लेखा।।
English explanation
Millions of Saraswatis and hundreds of millions of Sheshas cannot fully enumerate the Lord’s multitude of virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | सरस्वती, वाणी और विद्या की देवी | Saraswati, goddess of speech and learning |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| कोटि | करोड़ | millions |
| सत | सौ; सैकड़ों | a hundred; hundreds of |
| सेषा | शेष, नागराज | Shesha, the serpent king |
| करि | कर | do; make |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह | multitude |
| लेखा | गणना; पूरा विवरण | enumeration; complete account |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 509
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 509, 510
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।