अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।।
मूल पाठ
बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।।
भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे।।
स्रोत अभिलेख 2.171 · पुस्तक पृ. 485, 486
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लोग राजसभामें जाकर बैठ गये। तब मुनिने भरतजी तथा शत्रुघ्नजी दोनों भाइयोंको बुलवा भेजा। भरतजीको वसिष्ठजीने अपने पास बैठा लिया और नीति तथा धर्मसे भरे हुए वचन कहे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 485 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।।
English explanation
Everyone went and sat in the royal assembly. Word was sent to summon the two brothers, Bharata and Shatrughna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| राजसभाँ | राजसभा में | in the royal assembly |
| सब | सभी | everyone |
| जाई | जाकर | having gone |
| पठए | बुलावा भेजा | sent word |
| बोलि | बुलाने के लिए | to summon |
| भरत | भरत को | Bharata |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों को | brothers |
2 भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे।।
English explanation
Vasistha seated Bharata beside him and spoke words imbued with sound counsel and righteousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत को | Bharata |
| बसिष्ठ | वसिष्ठ ने | Vasistha, the royal preceptor |
| निकट | अपने पास | beside himself |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| नीति | नीति से युक्त | imbued with sound counsel |
| धरममय | धर्म से युक्त | imbued with righteousness |
| बचन | वचन | words |
| उचारे | कहे | spoke |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.171
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 485
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 485, 486
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