अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपिताजीके लिये भरतजीने जैसी करनी की वह लाखों मुखोंसे भी वर्णन नहीं की जा सकती। तब शुभ दिन शोधकर श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठजी आये और उन्होंने मन्त्रियों तथा सब महाजनोंको बुलवाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 485 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।।
सुदिनु सोधि मुनिबर तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।
स्रोत अभिलेख 2.171 · पुस्तक पृ. 485, 486
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।।
English explanation
AI draft: What Bharata did for his father's welfare cannot be described even by a hundred thousand mouths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता के | for his father |
| हित | हित में | for the welfare of |
| भरत | भरत ने | Bharata, Rama's brother |
| कीन्हि | किया | performed |
| जसि | जैसा | such as |
| करनी | कार्य | deed |
| सो | वह | that |
| मुख | मुखों से | by mouths |
| लाख | एक लाख | a hundred thousand |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| नहिं | नहीं | not |
| बरनी | वर्णित | described |
2 सुदिनु सोधि मुनिबर तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।
English explanation
Then, having determined an auspicious day, the eminent sage Vasistha came and summoned all the ministers and leading citizens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुदिनु | शुभ दिन | an auspicious day |
| सोधि | निर्धारित करके | having determined |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ | the eminent sage Vasistha |
| तब | तब | then |
| आए | आए | came |
| सचिव | मंत्रियों को | the ministers |
| महाजन | नगर के प्रमुख लोगों को | the leading citizens |
| सकल | सभी | all |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.171
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 485
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 485, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।