अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपहले तो कैकेयीने जैसी कुटिल करनी की थी, श्रेष्ठ मुनिने वह सारी कथा कही। फिर राजाके धर्मव्रत और सत्यकी सराहना की, जिन्होंने शरीर त्यागकर प्रेमको निबाहा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 485 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।।
भूप धरमब्रतु सत्य सराहा। जेहिं तनु परिहरि प्रेमु निबाहा।।
स्रोत अभिलेख 2.171 · पुस्तक पृ. 485, 486
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।।
English explanation
First, the eminent sage recounted the entire story, describing what the scheming Kaikeyi had done.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | first |
| कथा | घटना का वृत्तांत | the account of events |
| सब | पूरा | entire |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ ने | the eminent sage Vasistha |
| बरनी | वर्णन किया | recounted |
| कैकइ | कैकेयी ने | Kaikeyi, Bharata's mother |
| कुटिल | कुटिल | scheming |
| कीन्हि | किया था | had performed |
| जसि | जैसा | such as |
| करनी | कार्य | deed |
2 भूप धरमब्रतु सत्य सराहा। जेहिं तनु परिहरि प्रेमु निबाहा।।
English explanation
He praised King Dasharatha's commitment to righteousness and truth; the king had upheld his love by giving up his life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| धरमब्रतु | धर्मपालन के व्रत को | the vow to uphold righteousness |
| सत्य | सत्यनिष्ठा को | steadfastness in truth |
| सराहा | सराहा | praised |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| तनु | शरीर | his body |
| परिहरि | त्यागकर | having relinquished |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| निबाहा | निभाया | remained faithful to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.171
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 485
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 485, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।