अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।।
मूल पाठ
कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।।
बहुरि लखन सिय प्रीति बखानी। सोक सनेह मगन मुनि ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 2.171 · पुस्तक पृ. 485, 486
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके गुण, शील और स्वभावका वर्णन करते-करते तो मुनिराजके नेत्रोंमें जल भर आया और वे शरीरसे पुलकित हो गये। फिर लक्ष्मणजी और सीताजीके प्रेमकी बड़ाई करते हुए ज्ञानी मुनि शोक और स्नेहमें मग्र हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 485 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।।
English explanation
While recounting Rama's virtues, character, and disposition, the chief sage's eyes filled with tears and he thrilled with emotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while recounting |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| सील | शील; सदाचारी आचरण | noble character |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| पुलकेउ | रोमांचित हुए | thrilled with emotion |
| मुनिराऊ | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ | Vasistha, chief among sages |
2 बहुरि लखन सिय प्रीति बखानी। सोक सनेह मगन मुनि ग्यानी।।
English explanation
Then he described the love of Lakshmana and Sita. The wise sage became immersed in grief and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| लखन | लक्ष्मण का | of Lakshmana, Rama's brother |
| सिय | सीता का | of Sita, Rama's wife |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बखानी | वर्णन किया | described |
| सोक | शोक में | in grief |
| सनेह | स्नेह में | in affection |
| मगन | डूबे हुए | immersed |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vasistha |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.171
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 485
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 485, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।