अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु हे सखी! इनका न तो वह वेष (वल्कलवस्त्रधारी मुनिवेष) है, न सीताजी ही संग हैं। और इनके आगे चतुरङ्गिणी सेना चली जा रही है। फिर इनके मुख प्रसन्न नहीं हैं, इनके मनमें खेद है। हे सखी! इसी भेदके कारण सन्देह होता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 528 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।।
नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।।
स्रोत अभिलेख 2.222 · पुस्तक पृ. 528, 528
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।।
English explanation
“But, friend, the attire is not the same, Sita is not with them, and a fourfold army marches ahead.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेषु | वेश; पहनावा | attire |
| न | नहीं | not |
| सो | वही | the same |
| सखि | हे सखी | O friend |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| न | नहीं | not |
| संगा | साथ | with them |
| आगें | आगे | ahead |
| अनी | सेना | army |
| चली | चल रही है | is marching |
| चतुरंगा | चार अंगों वाली | fourfold |
2 नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।।
English explanation
“Their faces are not cheerful, and their minds are sorrowful. Friend, these differences cause doubt.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not |
| प्रसन्न | प्रसन्न; हर्षित | cheerful |
| मुख | मुख; चेहरे | faces |
| मानस | मन में | in the mind |
| खेदा | खेद; दुःख | sorrow |
| सखि | हे सखी | O friend |
| संदेहु | संदेह | doubt |
| होइ | होता है | arises |
| एहिं | इनसे; इन्हीं | from these |
| भेदा | भिन्नताओं से | differences |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.222
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 528
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 528, 528
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