अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।।
मूल पाठ
तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।।
तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।।
स्रोत अभिलेख 2.222 · पुस्तक पृ. 528, 528
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसका तर्क (युक्ति) अन्य स्त्रियोंके मन भाया। सब कहती हैं कि इसके समान सयानी (चतुर) कोई नहीं है। उसकी सराहना करके और 'तेरी वाणी सत्य है इस प्रकार उसका सम्मान करके दूसरी स्त्री मीठे वचन बोली॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 528 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।।
English explanation
Her reasoning convinced the women. They all say that no one is as discerning as she is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस स्त्री का | that woman’s |
| तरक | तर्क; विचार | reasoning |
| तियगन | स्त्रियों के समूह ने | the women |
| मन | मन में | in their minds |
| मानी | मान ली; स्वीकार की | accepted |
| कहहिं | कहती हैं | they say |
| सकल | सब | all |
| तेहि | उस स्त्री के | that woman |
| सम | समान | equal to |
| न | नहीं | not |
| सयानी | समझदार; विवेकशील | discerning |
2 तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।।
English explanation
After praising her and honoring her words as true, another woman spoke sweetly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस स्त्री को | that woman |
| सराहि | सराहकर | having praised |
| बानी | वाणी; कही हुई बात | her words |
| फुरि | सच्ची; सत्य | true |
| पूजी | आदर दिया; सम्मान किया | honored |
| बोली | बोली | spoke |
| मधुर | मधुर; प्रिय | sweet; gentle |
| बचन | वचन; बातें | words |
| तिय | स्त्री | woman |
| दूजी | दूसरी | another |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.222
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 528
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 528, 528
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