अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।।
मूल पाठ
कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।।
भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।
स्रोत अभिलेख 2.222 · पुस्तक पृ. 528, 528
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके राजतिलकका आनन्द जिस प्रकारसे भंग हुआ था वह सब कथाप्रसंग प्रेमपूर्वक कहकर फिर वह भाग्यवती स्त्री श्रीभरतजीके शील, स्नेह और स्वभावकी सराहना करने लगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 528 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।।
English explanation
She lovingly recounted the whole story—how the joy of Rama’s coronation had been shattered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; बताकर | having recounted |
| सपेम | प्रेम सहित | with affection |
| सब | सारा | the whole |
| कथाप्रसंगू | कथा का घटनाक्रम | course of the story |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| राम | राम के | Rama’s |
| राज | राज्याभिषेक का | of coronation |
| रस | आनंद | joy |
| भंगू | भंग होना; नष्ट होना | being shattered |
2 भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।
English explanation
Then that fortunate woman began praising Bharata’s character, affection, and disposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत की | Bharata, Rama’s brother |
| बहुरि | फिर | then; again |
| सराहन | प्रशंसा करने | to praise |
| लागी | लगी | began |
| सील | शील; सदाचरण | virtuous character |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सुभाय | स्वभाव | disposition |
| सुभागी | सौभाग्यवती स्त्री | the fortunate woman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.222
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 528
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 528, 528
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