अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।।
मूल पाठ
बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।।
भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा।।
स्रोत अभिलेख 2.191 · पुस्तक पृ. 501, 502
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उसने कहा—] हे भाइयो! जल्दी करो और सब सामान सजाओ। मेरी आज्ञा सुनकर कोई मनमें कायरता न लावे। सब हर्षके साथ बोल उठे—हे नाथ! बहुत अच्छा; और आपसमें एक- दूसरेका जोश बढ़ाने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 501 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।।
English explanation
Brothers, quickly prepare your battle gear. Hearing the command, no one lost courage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगहु | शीघ्र | quickly |
| भाइहु | हे भाइयो | O brothers |
| सजहु | तैयार करो | prepare |
| सँजोऊ | युद्ध के साज-सामान | battle equipment |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रजाइ | आज्ञा | the command |
| कदराइ | घबराया या पीछे हटा | quailed or shrank back |
| न | नहीं | not |
| कोऊ | कोई भी | anyone |
2 भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा।।
English explanation
All joyfully said, “Very well, lord!” and each spurred the others on.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भलेहिं | अच्छा, अवश्य | very well; certainly |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| सब | सभी | all |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सहरषा | हर्ष सहित | joyfully |
| एकहिं | एक-दूसरे को | one another |
| एक | प्रत्येक साथी | each companion |
| बढ़ावइ | बढ़ाता है | increases; stimulates |
| करषा | उत्साह और होड़ | ardor and rivalry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.191
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 501
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 501, 502
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।