अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरत, शत्रुघ्न दोनों भाई विकल होकर विलाप करने लगे। तब कौसल्याजीने उनको हृदयसे लगा लिया। अनेकों प्रकारसे भरतजीको समझाया और बहुत-सी विवेकभरी बातें उन्हें कहकर सुनायीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 482 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।।
भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए।।
स्रोत अभिलेख 2.167 · पुस्तक पृ. 482, 482
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।।
English explanation
Distraught, the two brothers Bharata and Shatrughna lament. Kaushalya draws them to her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिलपहिं | विलाप करते हैं | lament |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| कौसल्याँ | कौसल्या ने | Kaushalya, Rama’s mother |
| लिए | ले लिया | took them |
| हृदयँ | हृदय से | to her heart |
| लगाई | लगाकर | embracing |
2 भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए।।
English explanation
Kaushalya consoled Bharata in many ways, speaking words of discernment to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| अनेक | अनेक | many |
| भरतु | भरत को | Bharata |
| समुझाए | समझाया, सांत्वना दी | consoled and reassured |
| कहि | कहकर | speaking |
| बिबेकमय | विवेक से भरे | full of discernment |
| बचन | वचन | words |
| सुनाए | सुनाए | addressed to him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.167
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 482
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 482, 482
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।