अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी।।
मूल पाठ
बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी।।
अँथयउ आजु भानुकुल भानू। धरम अवधि गुन रूप निधानू।।
स्रोत अभिलेख 2.156 · पुस्तक पृ. 473, 473
भावार्थ
मूल पाठ के बाददास-दासीगण व्याकुल होकर विलाप कर रहे हैं और नगरनिवासी घर-घर रो रहे हैं। कहते हैं कि आज धर्मकी सीमा, गुण और रूपके भण्डार सूर्यकुलके सूर्य अस्त हो गये!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 473 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी।।
English explanation
Distraught male and female servants lament; the townspeople weep in every home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिलपहिं | विलाप करते हैं | lament |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| दास | दास; सेवक | male servants |
| अरु | और | and |
| दासी | दासियाँ; सेविकाएँ | female servants |
| घर | घर | home |
| घर | घर में | in each home |
| रुदनु | रोना; रुदन | weeping |
| करहिं | करते हैं | engage in |
| पुरबासी | नगरवासी | townspeople |
2 अँथयउ आजु भानुकुल भानू। धरम अवधि गुन रूप निधानू।।
English explanation
Today the sun of the solar dynasty has set—he was the pinnacle of righteousness and a treasury of virtue and beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अँथयउ | अस्त हो गया | has set |
| आजु | आज | today |
| भानुकुल | सूर्यवंश का | of the solar dynasty |
| भानू | सूर्य; दशरथ | sun; Dasharatha |
| धरम | धर्म की | of righteousness |
| अवधि | चरम सीमा | pinnacle |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| रूप | रूप का | of beauty |
| निधानू | भंडार | treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.156
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 473
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।