अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके बालसखा राजतिलकका समाचार सुनकर हृदयमें हॢषत होते हैं। वे दस-पाँच मिलकर श्रीरामचन्द्रजीके पास जाते हैं। प्रेम पहचानकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी उनका आदर करते हैं और कोमल वाणीसे कुशल-क्षेम पूछते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 363 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं।।
प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 363, 363
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: His childhood friends rejoice inwardly on hearing the news and go to Rama in groups of five or ten.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाल | बाल्यकाल के | of childhood |
| सखा | मित्र | friends |
| सुन | सुनकर | on hearing |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषाहीं | प्रसन्न होते हैं | rejoice |
| मिलि | मिलकर | gathering together |
| दस | दस | ten |
| पाँच | पाँच | five |
| राम | श्रीराम | Rama |
| पहिं | के पास | to |
| जाहीं | जाते हैं | go |
2 प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी।।
English explanation
Recognizing their affection, Lord Rama honors them and gently asks after their well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| आदरहिं | उनका आदर करते हैं | honors them |
| प्रेमु | उनका प्रेम | their affection |
| पहिचानी | पहचानकर | recognizing |
| पूँछहिं | पूछते हैं | asks |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| खेम | सुख-सुरक्षा | welfare and safety |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 363
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 363, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।