अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।।
मूल पाठ
फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।।
को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेह निबाहनिहारा।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 363, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने प्रिय सखा श्रीरामचन्द्रजीकी आज्ञा पाकर वे आपसमें एक-दूसरेसे श्रीरामचन्द्रजीकी बड़ाई करते हुए घर लौटते हैं और कहते हैं—संसारमें श्रीरघुनाथजीके समान शील और स्नेहको निबाहनेवाला कौन है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 363 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।।
English explanation
With their beloved Rama's permission, they return home, praising him among themselves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरहिं | लौटते हैं | return |
| भवन | घर | home |
| प्रिय | प्रिय राम की | of their beloved Rama |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | पाकर | having received |
| करत | करते हुए | making |
| परसपर | आपस में | among themselves |
| राम | राम की | of Rama |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
2 को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेह निबाहनिहारा।
English explanation
Who in the world equals Rama, the hero of Raghu's line, in maintaining gracious conduct and affection?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
| सरिस | के समान | equal to |
| संसारा | संसार में | in the world |
| सीलु | शील और सौजन्य | gracious conduct |
| सनेह | स्नेह | affection |
| निबाहनिहारा | निभाने वाला | one who faithfully maintains |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 363
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 363, 363
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