अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं।।
मूल पाठ
जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं।।
सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 363, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान् हमें यही दें कि हम अपने कर्मवश भ्रमते हुए जिस-जिस योनिमें जन्में, वहाँ-वहाँ (उस-उस योनिमें) हम तो सेवक हों और सीतापति श्रीरामचन्द्रजी हमारे स्वामी हों और यह नाता अन्ततक निभ जाय॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 363 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं।।
English explanation
Whatever forms of birth we wander through under the power of karma, may God grant us this in each—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेंहि | जिस-जिस | in whichever |
| जेंहि | जिस भी | each and every |
| जोनि | जन्म-योनि में | form of birth |
| करम | कर्म के | of karma |
| बस | वश में | under the power |
| भ्रमहीं | हम भटकें | we may wander |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | हर जगह | in each such state |
| ईसु | ईश्वर | God |
| देउ | दें | may grant |
| यह | यह वर | this boon |
| हमहीं | हमें | to us |
2 सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू।।
English explanation
May we be servants and Rama, Sita's husband, our master; may this bond endure to the end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक | servants |
| हम | हम | we |
| स्वामी | स्वामी | master |
| सियनाहू | सीता के पति राम | Rama, Sita's husband |
| होउ | हो; बना रहे | may be; may endure |
| नात | संबंध | relationship |
| यह | यह | this |
| ओर | अंत तक | to the end |
| निबाहू | निर्वाह बना रहे | may its faithful continuance endure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 363
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 363, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।