अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू।।
मूल पाठ
अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू।।
को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 363, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरमें सबकी ऐसी ही अभिलाषा है। परन्तु कैकेयीके हृदयमें बड़ी जलन हो रही है। कुसंगति पाकर कौन नष्ट नहीं होता। नीचके मतके अनुसार चलनेसे चतुराई नहीं रह जाती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 363 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू।।
English explanation
Such is the wish of everyone in the city, but Kaikeyi, daughter of the Kekaya king, feels intense burning distress in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसी | such |
| अभिलाषु | अभिलाषा | wish |
| नगर | नगर में | in the city |
| सब | सब | every |
| काहू | व्यक्ति की | person's |
| कैकयसुता | कैकय की पुत्री कैकेयी | Kaikeyi, daughter of the Kekaya king |
| ह्दयँ | हृदय में | in her heart |
| अति | अत्यंत | intense |
| दाहू | जलन और संताप | burning distress |
2 को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई।।
English explanation
Who has not been ruined by bad company? Sound judgment does not survive following a base person's counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| न | नहीं | not |
| कुसंगति | बुरी संगति | bad company |
| पाइ | पाकर | having acquired |
| नसाई | नष्ट हुआ | was ruined |
| रहइ | रहता है | remains |
| न | नहीं | not |
| नीच | नीच व्यक्ति की | of a base person |
| मतें | सलाह पर चलने से | by following the counsel |
| चतुराई | विवेक और समझदारी | discernment and good sense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 363
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 363, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।