अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना।।
मूल पाठ
बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना।।
भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 352, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादबहुत प्रकारके बाजे बज रहे हैं। नगरके अतिशय आनन्दका वर्णन नहीं हो सकता। सब लोग भरतजीका आगमन मना रहे हैं और कह रहे हैं कि वे भी शीघ्र आवें और [राज्याभिषेकका उत्सव देखकर] नेत्रोंका फल प्राप्त करें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 352 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना।।
English explanation
Musical instruments of many kinds are playing. The city's joy is beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाजहिं | बज रहे हैं | are sounding |
| बाजने | वाद्ययंत्र | musical instruments |
| बिबिध | विविध | various |
| बिधाना | प्रकार के | of kinds |
| पुर | नगर का | of the city |
| प्रमोदु | आनंद | joy |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन किया | described |
2 भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं।।
English explanation
Everyone wishes for Bharata's arrival: may he come quickly and his eyes gain the reward of beholding the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama's brother |
| आगमनु | आगमन की | arrival |
| सकल | सब लोग | everyone |
| मनावहिं | कामना करते हैं | wish for |
| आवहुँ | वे आएँ | may he come |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| नयन | नेत्रों का | of the eyes |
| फलु | फल; दर्शन का सुख | reward; joy of seeing |
| पावहिं | वे पाएँ | may he obtain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 352
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 352, 353
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