अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके गुण, शील और स्वभावका बखान कर, मुनिराज प्रेमसे पुलकित होकर बोले— [हे रामचन्द्रजी!] राजा (दशरथजी)-ने राज्याभिषेककी तैयारी की है। वे आपको युवराज-पद देना चाहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 351 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।।
भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 351, 352
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।।
English explanation
AI draft: Having described Rama’s virtues, character, and disposition, the sage Vashishtha spoke, thrilled with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन करके | having described |
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| गुन | गुण | virtues |
| सीलु | शील; सदाचरण | character; good conduct |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| बोले | बोले | spoke |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| पुलकि | पुलकित होकर | with a thrill of joy |
| मुनिराऊ | मुनिराज वसिष्ठ | Vashishtha, the eminent sage |
2 भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू।।
English explanation
The king has arranged everything for the consecration; he wishes to appoint you crown prince.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| सजेउ | सजाया; जुटाया | prepared; assembled |
| अभिषेक | राज्याभिषेक की | for the royal consecration |
| समाजू | सामग्री और व्यवस्था | materials and arrangements |
| चाहत | चाहते हैं | wishes |
| देन | देना | to grant |
| तुम्हहि | तुम्हें ही | to you |
| जुबराजू | युवराज-पद | the office of crown prince |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 351
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 351, 352
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।