अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवनके लिये तो ब्रह्माजीने विषयसुखको न जाननेवाली कोल और भीलोंकी लड़कियोंको रचा है, जिनका पत्थरके कीड़े-जैसा कठोर स्वभाव है। उन्हें वनमें कभी क्लेश नहीं होता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 393 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।।
पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.6 · पुस्तक पृ. 393, 394
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।।
English explanation
Brahma created the young women of the Kol and Kirat communities suited to the forest and unfamiliar with sensual comforts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन | the forest |
| हित | के अनुकूल; के लिए | suited to; for |
| कोल | कोल वनवासी समुदाय | the forest-dwelling Kol community |
| किरात | किरात वनवासी समुदाय | the forest-dwelling Kirat community |
| किसोरी | युवतियाँ | young women |
| रचीं | बनाईं; रचीं | created them |
| बिरंचि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| बिषय | इंद्रियों के विषयों के | of the senses |
| सुख | सुख; भोग-विलास | pleasures; comforts |
| भोरी | अनजान; अनभिज्ञ | unfamiliar; unacquainted |
2 पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ।।
English explanation
Their nature is hardy, like worms living in stone; they suffer no hardship in the forest at any time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइन | पत्थर में रहने वाले | living in stone |
| कृमि | कीड़े | worms |
| जिमि | जैसे | like |
| कठिन | कठोर; कष्ट सहने वाला | hardy; enduring hardship |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| तिन्हहि | उन्हीं युवतियों को | to those young women |
| कलेसु | कष्ट | hardship |
| न | नहीं | not |
| कानन | वन में | in the forest |
| काऊ | कभी भी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 393
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 393, 394
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।