अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बन दुख नाथ कहे बहुतेरे। भय बिषाद परिताप घनेरे।।
मूल पाठ
बन दुख नाथ कहे बहुतेरे। भय बिषाद परिताप घनेरे।।
प्रभु बियोग लवलेस समाना। सब मिलि होहिं न कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.66 · पुस्तक पृ. 398, 398
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! आपने वनके बहुत-से दु:ख और बहुत-से भय, विषाद और सन्ताप कहे। परन्तु हे कृपानिधान! वे सब मिलकर भी प्रभु (आप) के वियोग [से होनेवाले दु:ख] के लवलेशके समान भी नहीं हो सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 398 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बन दुख नाथ कहे बहुतेरे। भय बिषाद परिताप घनेरे।।
English explanation
My lord, you have described many hardships of the forest—much fear, sorrow, and distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन के | of the forest |
| दुख | दुःख; कष्ट | hardships; suffering |
| नाथ | हे स्वामी | O my lord |
| कहे | आपने बताए | you have described |
| बहुतेरे | बहुत-से | many |
| भय | डर | fear |
| बिषाद | शोक; उदासी | sorrow; sadness |
| परिताप | संताप; पीड़ा | distress; anguish |
| घनेरे | बहुत अधिक | abundant; much |
2 प्रभु बियोग लवलेस समाना। सब मिलि होहिं न कृपानिधाना।।
English explanation
O treasure of compassion, all those hardships together will not equal even the tiniest fraction of separation from you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | स्वामी आपसे | from you, my lord |
| बियोग | वियोग; बिछोह | separation |
| लवलेस | अत्यंत छोटा अंश | the tiniest fraction |
| समाना | के बराबर | equal to |
| सब | सभी वन-कष्ट | all the forest hardships |
| मिलि | मिलकर | combined |
| होहिं | होंगे | will be |
| न | नहीं | not |
| कृपानिधाना | हे कृपा के भंडार | O treasure of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 398
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 398, 398
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।