अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा जीमें जानकर, हे सुजानशिरोमणि ! आप मुझे साथ ले लीजिये, यहाँ न छोडिय़े। हे स्वामी! मैं अधिक क्या विनती करूँ? आप करुणामय हैं और सबके हृदयके अंदरकी जाननेवाले हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 398 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि।।
बिनती बहुत करौं का स्वामी। करुनामय उर अंतरजामी।।
स्रोत अभिलेख 2.66 · पुस्तक पृ. 398, 398
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि।।
English explanation
O foremost among the wise, knowing this in your heart, please take me with you; do not leave me behind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; this |
| जियँ | मन में | in your heart |
| जानि | जानकर; समझकर | knowing; understanding |
| सुजान | समझदारों के | among the wise |
| सिरोमनि | हे शिरोमणि; सर्वश्रेष्ठ | O foremost; crown jewel |
| लेइअ | ले लीजिए | please take |
| संग | साथ | along with you |
| मोहि | मुझे | me |
| छाड़िअ | छोड़िए | leave behind |
| जनि | मत | do not |
2 बिनती बहुत करौं का स्वामी। करुनामय उर अंतरजामी।।
English explanation
My lord, why should I plead at length? You are compassionate and know the heart’s innermost thoughts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनती | विनती; प्रार्थना | pleading; entreaty |
| बहुत | बहुत; अधिक | much; at length |
| करौं | मैं करूँ | should I make |
| का | क्यों; क्या आवश्यकता | why; what need |
| स्वामी | हे स्वामी | O my lord |
| करुनामय | करुणा से भरे | full of compassion |
| उर | हृदय के | of the heart |
| अंतरजामी | भीतर की बात जानने वाले | knower of what lies within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 398
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 398, 398
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।