अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू।।
मूल पाठ
कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू।।
छिनु छिनु प्रभु पद कमल बिलोकि। रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी।।
स्रोत अभिलेख 2.66 · पुस्तक पृ. 398, 398
भावार्थ
मूल पाठ के बादकन्द, मूल और फल ही अमृतके समान आहार होंगे और [वनके] पहाड़ ही अयोध्याके सैकड़ों राजमहलोंके समान होंगे। क्षण-क्षणमें प्रभुके चरणकमलोंको देख-देखकर मैं ऐसी आनन्दित रहूँगी जैसी दिनमें चकवी रहती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 398 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू।।
English explanation
Tubers, roots, and fruits will be nectar-like food; the mountains will be like a hundred palaces of Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंद | कंद | edible tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| अमिअ | अमृत-जैसा | nectar-like |
| अहारू | भोजन | food |
| अवध | अयोध्या के | of Ayodhya |
| सौध | महल | palaces |
| सत | सौ | a hundred |
| सरिस | के समान | like; equal to |
| पहारू | पहाड़ | mountains |
2 छिनु छिनु प्रभु पद कमल बिलोकि। रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी।।
English explanation
Gazing moment by moment at my lord’s lotus feet, I shall remain joyful like a female chakravaka bird in daytime.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छिनु | क्षण | moment |
| छिनु | क्षण; हर क्षण | moment; at every moment |
| प्रभु | स्वामी राम के | of my lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-सदृश | lotus-like |
| बिलोकि | देखकर | having gazed at |
| रहिहउँ | मैं रहूँगी | I shall remain |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| दिवस | दिन में | in daytime |
| जिमि | जैसे | like; as |
| कोकी | चकवी | female chakravaka bird |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 398
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 398, 398
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।