अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।।
मूल पाठ
बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।।
राम रहित रथ देखिहि जोई। सकुचिहि मोहि बिलोकत सोई।।
स्रोत अभिलेख 2.145 · पुस्तक पृ. 464, 465
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुँहसे वचन नहीं निकलते। हृदयमें पछताते हैं कि मैं अयोध्यामें जाकर क्या देखूँगा? श्रीरामचन्द्रजीसे शून्य रथको जो भी देखेगा, वही मुझे देखनेमें संकोच करेगा (अर्थात् मेरा मुँह नहीं देखना चाहेगा)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 464 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।।
English explanation
No words come out; he laments in his heart: ‘Whom shall I see when I go to Ayodhya?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचनु | शब्द | words |
| न | नहीं | not |
| आव | निकलते | come forth |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| पछिताई | पछताते हैं | laments |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| काह | किसे | whom |
| मैं | मैं | I |
| देखब | देखूँगा | shall see |
| जाई | जाकर | having gone |
2 राम रहित रथ देखिहि जोई। सकुचिहि मोहि बिलोकत सोई।।
English explanation
‘Whoever sees the chariot without Rama will feel distressed and ill at ease on seeing me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम | Rama, the exiled prince |
| रहित | के बिना | without |
| रथ | रथ | chariot |
| देखिहि | देखेगा | will see |
| जोई | जो भी | whoever |
| सकुचिहि | संकोच और व्यथा अनुभव करेगा | will feel distressed and ill at ease |
| मोहि | मुझे | me |
| बिलोकत | देखते हुए | on seeing |
| सोई | वही | that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.145
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 464
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 464, 465
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।