अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।।
मूल पाठ
फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।।
सुदिन सुघरी तात कब होइहि। जननी जिअत बदन बिधु जोइहि।।
स्रोत अभिलेख 2.68 · पुस्तक पृ. 399, 400
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे विधाता! क्या मेरी दशा भी फिर पलटेगी? क्या अपने नेत्रोंसे मैं इस मनोहर जोड़ीको फिर देख पाऊँगी? हे पुत्र! वह सुन्दर दिन और शुभ घड़ी कब होगी जब तुम्हारी जननी जीते-जी तुम्हारा चाँद-सा मुखड़ा फिर देखेगी!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 400 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।।
English explanation
Will providence turn my circumstances around again? Will I see the lovely pair, Rama and Sita, with my own eyes?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरहि | बदलेंगे; फेरेंगे | will turn around |
| दसा | दशा; परिस्थिति | circumstances |
| बिधि | विधाता | the ordainer of fate |
| बहुरि | फिर | again |
| कि | क्या | whether; will |
| मोरी | मेरी | my |
| देखिहउँ | मैं देखूँगी | shall I see |
| नयन | आँखों से | with my eyes |
| मनोहर | मन को मोहने वाली | lovely |
| जोरी | राम-सीता की जोड़ी | the pair of Rama and Sita |
2 सुदिन सुघरी तात कब होइहि। जननी जिअत बदन बिधु जोइहि।।
English explanation
My son, when will that blessed day and hour come, when your mother, still alive, will behold your moonlike face?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुदिन | शुभ दिन | auspicious day |
| सुघरी | शुभ घड़ी | auspicious hour |
| तात | बेटा | dear son |
| कब | कब | when |
| होइहि | होगी; आएगी | will come |
| जननी | माता | your mother |
| जिअत | जीते-जी | while still alive |
| बदन | तुम्हारा मुख | your face |
| बिधु | चंद्रमा | moon |
| जोइहि | देखेगी | will behold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 400
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 400
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।