अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीने प्रिय वचन कहकर प्रियतमा सीताजीको समझाया। फिर माताके पैरों लगकर आशीर्वाद प्राप्त किया। [माताने कहा—] बेटा! जल्दी लौटकर प्रजाके दु:खको मिटाना और यह निठुर माता तुम्हें भूल न जाय!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 400 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।।
बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.68 · पुस्तक पृ. 399, 400
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।।
English explanation
With loving words Rama reassured his beloved Sita; then he bowed at his mother’s feet and received her blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having spoken |
| प्रिय | मधुर; प्रिय लगने वाले | loving; pleasing |
| बचन | वचन | words |
| प्रिया | प्रिय पत्नी सीता को | his beloved wife Sita |
| समुझाई | समझाया; ढाढ़स दिया | reassured |
| लगे | लगे; प्रणाम किया | bowed at |
| मातु | माता के | his mother’s |
| पद | चरणों में | feet |
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| पाई | प्राप्त किया | received |
2 बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई।।
English explanation
His mother said, ‘Return soon and relieve the people’s sorrow; do not become hard-hearted and forget your mother.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगि | शीघ्र | soon |
| प्रजा | प्रजा का | the people’s |
| दुख | दुःख | sorrow |
| मेटब | मिटाना | relieve |
| आई | लौटकर आकर | having returned |
| जननी | माता को | your mother |
| निठुर | निष्ठुर होकर | being hard-hearted |
| बिसरि | भूल | forget |
| जनि | मत | do not |
| जाई | जाना | come to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 400
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 400
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।