अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।।
मूल पाठ
कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।।
नहिं बिषाद कर अवसरु आजू। बेगि करहु बन गवन समाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.68 · पुस्तक पृ. 399, 400
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब कृपालु, सूर्यकुलके स्वामी श्रीरामचन्द्रजीने कहा कि सोच छोड़कर मेरे साथ वनको चलो। आज विषाद करनेका अवसर नहीं है। तुरंत वनगमनकी तैयारी करो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 400 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।।
English explanation
The compassionate lord of the solar lineage, Rama, said, ‘Set aside your sorrow and come with me to the forest.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउ | कहा | said |
| कृपाल | दयालु | compassionate |
| भानुकुलनाथा | सूर्यवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the solar lineage |
| परिहरि | छोड़कर | setting aside |
| सोचु | चिंता; शोक | worry; sorrow |
| चलहु | चलो | come |
| बन | वन में | to the forest |
| साथा | मेरे साथ | with me |
2 नहिं बिषाद कर अवसरु आजू। बेगि करहु बन गवन समाजू।।
English explanation
Today is no time for grief; quickly make preparations for going to the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं है | is not |
| बिषाद | विषाद; शोक | grief |
| कर | का | for |
| अवसरु | समय | time |
| आजू | आज | today |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| करहु | करो | make |
| बन | वन को | to the forest |
| गवन | प्रस्थान | departure |
| समाजू | तैयारी; व्यवस्था | preparations; arrangements |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 400
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 400
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।