अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर सीताजी बहुत ही व्याकुल हो गयीं। वे वचनके वियोगको भी न सँभाल सकीं। (अर्थात् शरीरसे वियोगकी बात तो अलग रही, वचनसे भी वियोगकी बात सुनकर वे अत्यन्त विकल हो गयीं) उनकी यह दशा देखकर श्रीरघुनाथजीने अपने जीमें जान लिया कि हठपूर्वक इन्हें यहाँ रखनेसे ये प्राणोंको न रखेंगी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 399 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।।
देखि दसा रघुपति जियँ जाना। हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।।
स्रोत अभिलेख 2.68 · पुस्तक पृ. 399, 400
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।।
English explanation
Having said this, Sita became deeply distraught; at the words of separation, she could not compose herself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| भइ | हो गईं | became |
| भारी | अत्यंत | deeply |
| बचन | बात; वचन | words |
| बियोगु | वियोग की | of separation |
| न | नहीं | not |
| सकी | सक सकीं | could |
| सँभारी | अपने को सँभालना | compose herself |
2 देखि दसा रघुपति जियँ जाना। हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।।
English explanation
Seeing her condition, Rama understood in his heart that if he insisted on keeping her behind, she would not remain alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| दसा | दशा | condition |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जाना | समझ लिया | understood |
| हठि | हठपूर्वक | insistently |
| राखें | रोक रखने पर | if kept behind |
| नहिं | नहीं | not |
| राखिहि | रख सकेंगी | would preserve |
| प्राना | प्राण | her life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 399
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 400
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।