अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजानकीजी अपने प्यारे कुटुम्बियोंसे—जो जिस योग्य था, उससे उसी प्रकार मिलीं। जानकीजीको तपस्विनीके वेषमें देखकर सभी शोकसे अत्यन्त व्याकुल हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 582 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।।
तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 2.286 · पुस्तक पृ. 582, 583
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।।
English explanation
AI draft: Sita met her dear relatives, greeting each in the manner appropriate to that person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परिजनहि | परिजनों से | with relatives |
| मिली | मिलीं | met |
| बैदेही | विदेहराज की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| जेहि | जिस प्रकार के मिलने के | for whichever manner of greeting |
| जोगु | योग्य था | was suited |
| भाँति | रीति से | in the manner |
| तेहि | उस व्यक्ति से | with that person |
| तेही | उसी प्रकार | in that very way |
2 तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी।।
English explanation
Seeing Sita dressed as an ascetic, everyone became distraught with deep sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी का | an ascetic’s |
| बेष | वेश | dress |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, Janaka’s daughter |
| देखी | देखकर | having seen |
| भा | हो गया | became |
| सबु | सब लोग | everyone |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| बिषाद | दुःख से | with sorrow |
| बिसेषी | अत्यंत | especially deeply |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.286
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 582
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 582, 583
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।