अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।।
मूल पाठ
प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।।
सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 355, 356
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और फिर बोलीं—] हे प्रिय वचन कहनेवाली मन्थरा! मैंने तुझको यह सीख दी है (शिक्षाके लिये इतनी बात कही है)। मुझे तुझपर स्वप्रमें भी क्रोध नहीं है। सुन्दर मङ्गलदायक शुभ दिन वही होगा जिस दिन तेरा कहना सत्य होगा (अर्थात् श्रीरामका राज्यतिलक होगा)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 355 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।।
English explanation
Sweet-speaking one, I only gave you advice; I am not angry with you even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रियबादिनि | हे प्रिय बोलनेवाली | O sweet-speaking woman |
| सिख | सीख; सलाह | advice; counsel |
| दीन्हिउँ | मैंने दी | I gave |
| तोही | तुझे | to you |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| तो | तुझ | you |
| पर | पर | toward |
| कोपु | क्रोध | anger |
| न | नहीं | not |
| मोही | मुझे | in me; for me |
2 सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई।।
English explanation
The day when what you have said comes true will be an auspicious day bringing great good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुदिनु | शुभ दिन | auspicious day |
| सुमंगल | बड़ा मंगल; शुभ फल | great good fortune |
| दायकु | देनेवाला | bestowing |
| सोई | वही | that very one |
| तोर | तेरा | your |
| कहा | कहा हुआ | what was said |
| फुर | सच | true |
| जेहि | जिस | on which |
| दिन | दिन | day |
| होई | होगा | will become |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 355
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 355, 356
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