अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रान कंठगत भयउ भुआलू। मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू।।
मूल पाठ
प्रान कंठगत भयउ भुआलू। मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू।।
इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी। जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी।।
स्रोत अभिलेख 2.154 · पुस्तक पृ. 471, 472
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाके प्राण कण्ठमें आ गये। मानो मणिके बिना साँप व्याकुल (मरणासन्न) हो गया हो। इन्द्रियाँ सब बहुत ही विकल हो गयीं, मानो बिना जलके तालाबमें कमलोंका वन मुरझा गया हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 471 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रान कंठगत भयउ भुआलू। मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू।।
English explanation
AI draft: King Dasharatha's life seemed poised to leave him; he became distraught like a serpent deprived of its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रान | प्राण | life breath |
| कंठगत | कंठ तक पहुँचे हुए; निकलने को तैयार | at the throat, about to depart |
| भयउ | हो गया | became |
| भुआलू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| मनि | मणि | jewel |
| बिहीन | से रहित | deprived of |
| जनु | मानो | as though |
| ब्याकुल | अत्यंत बेचैन | distraught |
| ब्यालू | साँप | serpent |
2 इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी। जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी।।
English explanation
All his senses became deeply distressed, like a lake's cluster of lotuses languishing without water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इद्रीं | इंद्रियाँ | senses |
| सकल | सभी | all |
| बिकल | विकल; अस्थिर | distressed; disordered |
| भइँ | हो गईं | became |
| भारी | अत्यंत | greatly |
| जनु | मानो | as though |
| सर | तालाब का | of a lake |
| सरसिज | कमलों का | of lotuses |
| बनु | समूह; वन | cluster; grove |
| बिनु | बिना | without |
| बारी | जल | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.154
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 471
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 471, 472
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।