अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।।
मूल पाठ
प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।।
चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.221 · पुस्तक पृ. 527, 528
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबेरे एक ही खेवेमें सब लोग पार हो गये और श्रीरामचन्द्रजीके सखा निषादराजकी इस सेवासे सन्तुष्ट हुए। फिर स्नान करके और नदीको सिर नवाकर निषादराजके साथ दोनों भाई चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 527 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।।
English explanation
In the morning, everyone crossed in a single trip and was pleased with the service of Rama’s friend, the Nishada chief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रात | प्रातःकाल | in the morning |
| पार | दूसरे तट पर | across to the other bank |
| भए | हो गए; पहुँच गए | reached |
| एकहि | एक ही | a single |
| खेंवाँ | नावों की खेप में | boat trip |
| तोषे | संतुष्ट हुए | were pleased |
| रामसखा | राम के मित्र निषादराज गुह | Rama’s friend, Guha, the Nishada chief |
| की | की | of |
| सेवाँ | सेवा से | by the service |
2 चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।।
English explanation
After bathing and bowing to the river, they set out; the Nishada chief accompanied the two brothers, Bharata and Shatrughna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| नहाइ | स्नान करके | after bathing |
| नदिहि | नदी को | to the river |
| सिर | सिर | the head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| साथ | साथ में | along with |
| निषादनाथ | निषादों के राजा गुह | Guha, chief of the Nishadas |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई भरत और शत्रुघ्न | brothers, Bharata and Shatrughna |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.221
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 527
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 527, 528
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।