अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।।
मूल पाठ
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।।
रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।।
स्रोत अभिलेख 2.221 · पुस्तक पृ. 527, 528
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस दिन यमुनाजीके किनारे निवास किया। समयानुसार सबके लिये [खान-पान आदिकी] सुन्दर व्यवस्था हुई। [निषादराजका सङ्केत पाकर] रात-ही-रातमें घाट-घाटकी अगणित नावें वहाँ आ गयीं, जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 527 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।।
English explanation
They camped on the Yamuna bank that day, and everyone found suitable accommodation for the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जमुन | यमुना नदी | the Yamuna River |
| तीर | तट पर | on the bank |
| तेहि | उस | that |
| दिन | दिन | day |
| करि | करके | having made |
| बासू | निवास | a stay; camp |
| भयउ | हो गया; मिला | became available |
| समय | समय; अवसर | the time; occasion |
| सम | के अनुरूप | appropriate to |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सुपासू | ठहरने की अच्छी सुविधा | comfortable accommodation |
2 रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।।
English explanation
That very night, countless boats arrived from every landing, too many to describe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रातहिं | रात में ही | that very night |
| घाट | घाट | landing |
| घाट | घाट; प्रत्येक घाट | landing; every landing |
| की | की | belonging to; from |
| तरनी | नावें | boats |
| आईं | आ गईं | arrived |
| अगनित | असंख्य | countless |
| जाहिं | जा सकती हैं | can be |
| न | नहीं | not |
| बरनी | वर्णित | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.221
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 527
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 527, 528
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