अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा। सादर जासु लहइ नित नासा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिसकी नासिका प्रभु (आप) के पवित्र और सुगन्धित [पुष्पादि] सुन्दर प्रसादको नित्य आदरके साथ ग्रहण करती (सूँघती) है, और जो आपको अर्पण करके भोजन करते हैं और आपके प्रसादरूप ही वस्त्राभूषण धारण करते हैं;॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 451 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा। सादर जासु लहइ नित नासा।।
तुम्हहि निबेदित भोजन करहीं। प्रभु प्रसाद पट भूषन धरहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.129 · पुस्तक पृ. 451, 451
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा। सादर जासु लहइ नित नासा।।
English explanation
Whose nose daily receives with reverence the pure, lovely fragrance offered to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु को अर्पित | offered to the Lord |
| प्रसाद | प्रसादरूप में प्राप्त | received as a blessed offering |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सुभग | सुंदर, मनोहर | lovely, pleasing |
| सुबासा | सुगंध | fragrance |
| सादर | आदरपूर्वक | with reverence |
| जासु | जिनकी | whose |
| लहइ | ग्रहण करती है | receives |
| नित | नित्य | daily |
| नासा | नासिका | nose |
2 तुम्हहि निबेदित भोजन करहीं। प्रभु प्रसाद पट भूषन धरहीं।।
English explanation
They eat food offered to you and wear garments and ornaments received as the Lord’s blessed gifts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपको, राम को | to you, Rama |
| निबेदित | अर्पित किया हुआ | offered |
| भोजन | भोजन | food |
| करहीं | करते हैं; खाते हैं | eat |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| प्रसाद | प्रसादरूप में प्राप्त | received as blessed gifts |
| पट | वस्त्र | garments |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| धरहीं | धारण करते हैं | wear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 451
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 451, 451
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।