अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभु (आप) के चरणकमलोंकी रज, जो सत्य, सुकृत (पुण्य) और सुखकी सुहावनी सीमा (अवधि) है, उसकी दुहाई करके मैं अपने हृदयकी जागते, सोते और स्वप्रमें भी बनी रहनेवाली रुचि (इच्छा) कहता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 595 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।।
सो करि कहउँ हिए अपने की। रुचि जागत सोवत सपने की।।
स्रोत अभिलेख 2.301 · पुस्तक पृ. 595, 596
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।।
English explanation
I invoke the dust of the Lord’s lotus feet as my solemn pledge—the beautiful culmination of truth, merit, and happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल | lotuses |
| पराग | रज; पराग | dust; pollen |
| दोहाई | की शपथ; दुहाई | solemn invocation as a pledge |
| सत्य | सत्य | truth |
| सुकृत | पुण्य; शुभ कर्म | merit; virtuous deeds |
| सुख | सुख | happiness |
| सीवँ | परम सीमा | ultimate limit; culmination |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | beautiful; pleasing |
2 सो करि कहउँ हिए अपने की। रुचि जागत सोवत सपने की।।
English explanation
Taking that pledge, I state my heart’s desire, which remains with me while awake, asleep, and dreaming.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह शपथ | that pledge |
| करि | लेकर; करके | having taken; making |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| हिए | हृदय | heart |
| अपने | अपने | my own |
| की | की | of |
| रुचि | अभिलाषा; चाह | desire; inclination |
| जागत | जागते हुए | while awake |
| सोवत | सोते हुए | while asleep |
| सपने | सपने में | in dreams |
| की | की; अवस्थाओं में रहने वाली | belonging to those states |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 595
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 595, 596
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।