अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबसे पहले रामजी कैकेयीसे मिले और अपने सरल स्वभाव तथा भक्तिसे उसकी बुद्धिको तर कर दिया। फिर चरणोंमें गिरकर काल, कर्म और विधाताके सिर दोष मँढ़कर, श्रीरामजीने उनको सान्त्वना दी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 547 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।।
पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी। काल करम बिधि सिर धरि खोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.244 · पुस्तक पृ. 546, 547
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।।
English explanation
Rama first met Kaikeyi; his unaffected nature and reverent devotion touched her mind deeply.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | सबसे पहले | first |
| राम | राम | Rama |
| भेंटी | मिले | met |
| कैकेई | माता कैकेयी से | his mother Kaikeyi |
| सरल | निष्कपट | unaffected and sincere |
| सुभायँ | स्वभाव से | through his nature |
| भगति | भक्तिभाव; श्रद्धापूर्ण आदर | devotion; reverent regard |
| मति | कैकेयी की बुद्धि; मन | Kaikeyi's mind |
| भेई | भेद दी; गहराई से प्रभावित की | penetrated; deeply moved |
2 पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी। काल करम बिधि सिर धरि खोरी।।
English explanation
Then, bowing at her feet, Rama reassured her, placing the blame on time, karma, and the ordainer of fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पग | चरणों में | at her feet |
| परि | पड़कर; झुककर | bowing down |
| कीन्ह | किया | gave |
| प्रबोधु | समझाइश; ढाढ़स | reassurance and counsel |
| बहोरी | फिर | then |
| काल | काल; समय | time |
| करम | कर्म | karma; the effects of deeds |
| बिधि | विधाता | the ordainer of fate |
| सिर | सिर पर | upon the heads of |
| धरि | रखकर | placing |
| खोरी | दोष | the blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.244
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 547
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 546, 547
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।