अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।।
मूल पाठ
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।।
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा।
स्रोत अभिलेख 2.26 · पुस्तक पृ. 560, 561
भावार्थ
मूल पाठ के बादशरीरसे पुलकित होकर वे सभामें खड़े हो गये। कमलके समान नेत्रोंमें प्रेमाश्रुओंकी बाढ़ आ गयी। [वे बोले—] मेरा कहना तो मुनिनाथने ही निबाह दिया (जो कुछ मैं कह सकता था वह उन्होंने ही कह दिया)। इससे अधिक मैं क्या कहूँ?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 560 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।।
English explanation
Bharata’s body thrilled as he stood in the assembly; tears of love welled up in his lotus-like eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलकि | पुलकित होकर | thrilling with emotion |
| सरीर | शरीर | body |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| भए | हुए | became |
| ठाढें | खड़े | standing |
| नीरज | कमल-समान | lotus-like |
| नयन | नेत्र | eyes |
| नेह | प्रेम का | of love |
| जल | जल; आँसू | water; tears |
| बाढ़ें | बढ़ आए; उमड़ आए | welled up |
2 कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा।
English explanation
The chief of sages has expressed what I wished to say; what more can I say?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहब | कहने की बात | what was to be said |
| मोर | मेरी | my |
| मुनिनाथ | मुनियों के नाथ वसिष्ठ ने | Vasishtha, chief of sages |
| निबाहा | पूरा कर दिया; व्यक्त कर दिया | fulfilled; expressed |
| एहि | इस | this |
| तें | से | than |
| अधिक | अधिक | more |
| कहौं | कहूँ | may I say |
| मैं | मैं | I |
| काहा | क्या | what |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 560
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 560, 561
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।