अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपुलकित होकर वे दोनों प्रेमसहित एक-दूसरेसे कहते हैं कि ये सब शकुन भरतके आनेकी सूचना देनेवाले हैं। [उनको मामाके घर गये ] बहुत दिन हो गये; बहुत ही अवसेर आ रही है (बार-बार उनसे मिलनेकी मनमें आती है) शकुनोंसे प्रिय (भरत)-के मिलनेका विश्वास होता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 349 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं।।
भए बहुत दिन अति अवसेरी। सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी।।
स्रोत अभिलेख 2.7 · पुस्तक पृ. 349, 349
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं।।
English explanation
Thrilled with joy, they lovingly say to one another, ‘These are signs of Bharata’s arrival.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलकि | रोमांचित होकर | thrilled, with hair standing on end |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| परसपर | एक-दूसरे से | to one another |
| कहहीं | कहते हैं | they say |
| भरत | भरत के; राम के भाई | of Bharata, Rama’s brother |
| आगमनु | आने के | of the arrival |
| सूचक | सूचक | indicators |
| अहहीं | हैं | are |
2 भए बहुत दिन अति अवसेरी। सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी।।
English explanation
‘Many days have passed; it has been a very long wait. These omens give confidence that we shall meet our dear one.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए हैं | have passed |
| बहुत | बहुत | many |
| दिन | दिन | days |
| अति | बहुत अधिक | very much |
| अवसेरी | देर, लंबा अंतराल | delay, a long interval |
| सगुन | शुभ शकुनों से | from the favorable omens |
| प्रतीति | विश्वास होता है | confidence arises |
| भेंट | भेंट होने का | of meeting |
| प्रिय | प्रियजन | the dear one |
| केरी | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 349
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 349
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।