अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी।।
मूल पाठ
पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी।।
सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी।।
स्रोत अभिलेख 2.152 · पुस्तक पृ. 470, 470
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! सब पुरवासियों और कुटुम्बियोंसे निहोरा (अनुरोध) करके मेरी विनती सुनाना कि वही मनुष्य मेरा सब प्रकारसे हितकारी है जिसकी चेष्टासे महाराज सुखी रहें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 470 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी।।
English explanation
Dear sir, humbly convey my request to all the townspeople and family members.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| परिजन | परिवार के लोग | family members |
| सकल | सभी | all |
| निहोरी | विनय करके | having humbly entreated |
| तात | हे तात; स्नेहपूर्ण संबोधन | dear sir; an affectionate address |
| सुनाएहु | सुना देना | please convey |
| बिनती | विनती | request |
| मोरी | मेरी | my |
2 सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी।।
English explanation
Whoever helps the king remain happy is my well-wisher in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही व्यक्ति | that person |
| सब | सब | every |
| भाँति | प्रकार से | in way |
| मोर | मेरा | my |
| हितकारी | हित करने वाला | well-wisher |
| जातें | जिससे; जिसके कारण | through whom; because of whom |
| रह | रहें | may remain |
| नरनाहु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सुखारी | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.152
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 470
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 470
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।