अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ।।
मूल पाठ
कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ।।
पालेहु प्रजहि करम मन बानी। सेएहु मातु सकल सम जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.152 · पुस्तक पृ. 470, 470
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतके आनेपर उनको मेरा सँदेसा कहना कि राजाका पद पा जानेपर नीति न छोड़ देना; कर्म, वचन और मनसे प्रजाका पालन करना और सब माताओंको समान जानकर उनकी सेवा करना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 470 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ।।
English explanation
When Bharata arrives, convey this message: Do not abandon right conduct upon gaining kingship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहब | कहना | convey |
| सँदेसु | संदेश | message |
| भरत | भरत; राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| के | के | of |
| आएँ | आने पर | upon arriving |
| नीति | नीति; उचित आचरण | right conduct; principles of governance |
| न | नहीं | not |
| तजिअ | छोड़ना | abandon |
| राजपदु | राजा का पद | kingship |
| पाएँ | पाने पर | upon obtaining |
2 पालेहु प्रजहि करम मन बानी। सेएहु मातु सकल सम जानी।।
English explanation
Care for the subjects in deed, thought, and speech; serve all the mothers, regarding them equally.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पालेहु | पालन करना | care for |
| प्रजहि | प्रजा को | the subjects |
| करम | कर्म से | in deed |
| मन | मन से | in thought |
| बानी | वाणी से | in speech |
| सेएहु | सेवा करना | serve |
| मातु | माताओं को | the mothers |
| सकल | सभी | all |
| सम | समान | equal |
| जानी | समझकर | regarding as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.152
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 470
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 470
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