अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी। रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी।।
मूल पाठ
पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी। रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी।।
एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा। फिरइ त होइ प्रान अवलंबा।।
स्रोत अभिलेख 2.82 · पुस्तक पृ. 411, 412
भावार्थ
मूल पाठ के बादकभी पिताके घर, कभी ससुराल, जहाँ तुम्हारी इच्छा हो, वहीं रहना। इस प्रकार तुम बहुत- से उपाय करना। यदि सीताजी लौट आयीं तो मेरे प्राणोंको सहारा हो जायगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 411 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी। रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी।।
English explanation
‘Stay sometimes at your father’s home and sometimes at your in-laws’ home—wherever you wish.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितृगृह | पिता के घर में | at your father’s home |
| कबहुँ | कभी | sometimes |
| कबहुँ | कभी | sometimes |
| ससुरारी | ससुराल में | at your in-laws’ home |
| रहेहु | रहना | stay |
| जहाँ | जहाँ | wherever |
| रुचि | इच्छा | wish |
| होइ | हो | may be |
| तुम्हारी | तुम्हारी | your |
2 एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा। फिरइ त होइ प्रान अवलंबा।।
English explanation
Try many means in this way. If Sita returns, she will be a support to my life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in this manner |
| करेहु | करना | try |
| उपाय | उपाय | means |
| कदंबा | अनेक; समूह | a multitude |
| फिरइ | यदि वह लौटें | if she returns |
| त | तो | then |
| होइ | होंगी; बनेंगी | will be |
| प्रान | प्राणों का | for my life |
| अवलंबा | सहारा | a support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.82
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 411
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 411, 412
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।